Side B

Side B

कैसेट फिरा कर आज दूजी बात पहले सुनकर के देखी। बड़ा मुश्किल रहा, दूसरा पहलू सुनना। शायद पहली बात मेरी थी, तो दूजी रास न आई। किसी तीजे की होती तो बेहतर समझ पाता। हिम्मत कर के आज सुन ही डाला, उनका भी पूरा राग। 

आज घमण्ड के नाड़े को ढीला कर, ग़ुरूर के पर्दे फ़ाश किये। कुछ नया ही था ये किस्सा....

कमाल तो ये हुआ कि, ये भी सच निकला। कितना सही। मेरे सही से बिलकुल ग़लत, पर फिर भी कितना सही। 

बीच इल्ज़ाम में रोककर कई सफ़ाई मैंने भी दी। कई दफ़े बातों के ऊपर बातें भी भिड़ी। कई दफ़े कैसेट पीछे मुड़ी, फिर आगे बढ़ी। पर पहलू ये भी अधूरा नहीं। पहलू वो भी पूरा नहीं।

उतने ही शब्दो की माला थी, काफ़िये मिलाये भी नहीं। पर फिर भी ज़्यादा रोमानचक। और सही होकर भी पूरा सही नहीं। 

या मैं ही ग़लत था। 

उस बार भी.... हर बार ही। 

आज सुनकर देखूँ बाक़ी सारे, 

साइड-बी

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