पतंग

पतंग


मैं रौशनी को ढूंढू  क्यूँ ,

मेरे मन में रौशनी है।


कड़वाहट से बैर नहीँ,

मेरी रूह चाशनी है।


घूमेंगे गलियारे, फिरलेंगे सभी चौबारे ,


बैठें न इक पल को भी हम  उड़ते जाएंगे ।

 

हम भी जुगनुओं से मलंग हैं, आसमां का नीला रंग हैं,

रोको न हमको , रोको न हमको ,

उड़ने दो

की हम तो पतंग हैं।

 

रास्ता क्या होता है,

ये मैंने कभी न जाना।

मंज़िलें खुद गाती फिरती,मेरा ही अफ़साना।


नज़रों से है किसने देखा,

हवा को उड़ते फिरते।

खुद खुदा भी दिखा न करता, दुनिया ने जग छाना।

 

फिर फ़र्क कहाँ है प्यारे,

रख तू ही अपने सहारे।


बैठें न इक पल को भी हम  उड़ते जाएंगे।

 

देख के दुनिया हम भी दंग  हैं, आसमां का नीला रंग हैं,

रोको न हमको , रोको न हमको ,

उड़ने दो

की हम तो पतंग हैं।



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