ताना शाह

ताना शाह

मुझे एक जान, फ़रमान एक

तूने जारी किया

मुझे काटा बाटा लूटा तूने;

दमड़ी तक को बदल डाला, चमड़ी तक को नहीं छोड़ा

तू नहीं जाना, ताना शाह

मैं एक नहीं, मैं एक अरब हूं।


मेरे बचपन की याद को बदल डाला, मेरे शहर के नाम तक को नहीं छोड़ा

हम भूखे बेबसों को धर्म के नाम पर तोड़ा


एक एक दाने को, रसोई को, खाने को, कपड़ों तक को बाटा;

मैं नादान सही, पर कायर नहीं

नकाब के पीछे छिपता नहीं;

लाश नहीं हूं, चुप था बस

ख़ामोश रहा मैं, पर अब बस;

मुरख है तू

जो तू नहीं जाना, ताना शाह

तू सोच रहा, ये एक अकेला है

मैं एक नहीं, मैं एक अरब हूं।


तू हस रहा जिनकी आड़ में,

तेरे पीछे जो सोए हैं, सोच अगर वो जाग गए

तब किधर को भागेगा;

इंकलाब जब जागेगा, तब तू एक रह जाएगा

मैं हर तरफ़ से आऊंगा, मैं एक अरब  हो जाऊंगा।


इतिहास दोहराने वाले, तू बाज़ कहां आएगा;

मेरा शहर जलाने वाले, सुन

तू मुंह की खाएगा।


तुझसे क्या डरूं मैं;

तू इंसान का बच्चा, भगवान थोड़े ही है

कभी सोचा भी, तुझे माफ़ करूं

ऐसा भी बुरा हाल थोड़े ही है;

पर हद की तूने, बाज़ी जब ज़िन्दगी मौत की हो चली

तेरी लगाई आग में मरे बस मेरे लोग, ताना शाह;

एक मौक़ा अब और तुझे दूं, इतना मैं महान नहीं 

मैं भी इंसान का बच्चा हूं, भगवान नहीं।


अभी हवा में गर्मी है, आने वाला तूफ़ान मैं हूं

मैं बिजली हूं, मैं क्रांति, मैं आज़ादी, मैं आवाज़ 

सब हूं;

तू सिर्फ़ एक है, कातिल -ए- हिन्द 

मैं, एक अरब हूं।

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