आतिश
आतिश
एक आतिश तो पल भर का है, उसकी क्या बिसात
बस एक पल को रोशन है, फिर इक पल में रात
फिर क्यों इतने गीत करोड़ों, हर दिन गाए जाते हैं
चुपचाप जो गुमसुम बैठे थे सारे दीपक खिल जाते हैं
सागर चाहे हो बहुत बड़ा
पर तनहा ही रह जाता है
आतिश दरियादिल पल भर में
रोशन दुनिया कर जाता है
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