ये समाज

बाप ने रुपया रुपया जोड़ कर दौलत कमाई
तब मां ने पक्के मकान में गृहस्थी जमाई

बाप ने कहा दयालु बनो, नाम कमाओ
नेकी करो बेटा, दरिया में बहाओ

मां ने बस बच्चों की सोची
कहा पैसा सोचो पैसा खाओ, प्रैक्टिकल बनो बेटा, दुनिया को आग लगाओ

हम उस दुनिया के वासी हैं जहां इस बाप की सुनने का ख़ामियाजा भुगतना पड़ा।

हिन्दू मुस्लिम
ब्राह्मिन दलित
लेफ्ट राईट
ये सब तुम्हें मुबारक...

ऐसे समाज का मैं क्या करूंगा जहां दया दिखाना  कमज़ोरी हो गया।
मुझे यहां नहीं रहना

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